Thursday, 30 May 2013

संसार के सारे ही रंग बेटियों से ही होते है ...

आँखे बंद करके 
सोचा जब तुझे  ,
छोटे - छोटे,नर्म -मुलायम ,
हाथों को ,
फूलों की पंखुड़ी से
 कोमल मुखड़े  को 
अपने बहुत करीब पाया ...  




सोचती हूँ
 कितना अद्भुत होता 
 जो तुम मेरी बाँहों में झूलती,
कभी ओझल न करती 
अपनी नज़रों से ,
तुम्हारी भोली मुस्कान-
पर दुनिया ही वार देती मैं  ...


पहनाती तुझे
पैरो में नन्ही -नन्ही पायल ,
महसूस करती ,
 घुंघरू के रुनझुन को अंतर्मन में 


.


 किस्मत वाले ही
 होते वे जिनके घर होती हैं बेटियां
 मुझे तुझ बिन दुनिया ही 
बे-रंग लगती है ,
क्यूंकि संसार के सारे ही रंग बेटियों 
से ही होते है ...