Monday, 27 May 2013

हर किसी की अपनी -अपनी आशाएं है ......

भोर होते ही ,
जैसे चल पड़ती है 
जिन्दगी 
अपनी रफ़्तार पर ,
एक नयी आशा लिए 
इस आशा रूपी सागर पर ...

एक बूढी माँ को इंतज़ार
है अपने लाल का जो
सिर्फ पैसे के साथ सांत्वना ही
भेजता है ,
अगले त्यौहार पर आने की ...

एक ललना को इंतजार है ,
अपने सुहाग का जो दूर
परदेश गया है कमाने ...

एक बहन को इंतज़ार है ,
अपने भाई का जो उससे
रूठा है ,
इंतज़ार है उसे मायके की दहलीज़
से पुकार का ...

हर किसी की
अपनी -अपनी आशाएं है
इंतज़ार है ,
हर सुबह जो ले कर आती है ...

ये जिन्दगी की नाव तो रफ़्तार से
चलती ही रहती है ,
पर इसकी पतवार थामे हुए तो
वह ऊपर वाला ही है ,
जो हर किसी की आशा
पूरी करता है ..
.

चित्र गूगल से साभार