Monday, 13 May 2013

चुप सी चल रही थी जिन्दगी ......


चुप सी चल रही थी
जिन्दगी ,
एक ठहरी हुयी सी
नाव की तरह ...
ना सुबह के होने की
थी कोई
उमंग ही ,
 ना ही शाम होने की
ललक ही ,
दिन  चल रहे थे
और रातें  रुकी हुई थी ..

सहसा  ये क्या हुआ ,
मेरे मन में ये कैसी
हिलोर उठी ,
शांत लहरों पर रुकी हुई
नाव की पतवार किसने
थाम ली ...!
क्या यह तुम्हारे आने
का इशारा है ....!


16 comments:

  1. बहुत अच्छा उपासना जी ,लिखते रहें ,आगे बढ़ते रहें

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  2. ये हलचल कहीं ये वो तो नहीं
    बहुत सुन्दर भावमय प्रस्तुति

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  3. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 15/05/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. भावपूर्ण सुंदर रचना
    बधाई
    आग्रह है पढ़े "अम्मा"
    http://jyoti-khare.blogspot.in

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  5. बहुत सुन्दर ,भावपूर्ण रचना

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  6. पर ,
    आचनक .............थाम ली ....! सुन्दर पंक्तियाँ

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  7. सुन्दर ,भावपूर्ण पंक्तियाँ

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  8. बहुत ही बेहतरीन भावपूर्ण रचना.

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  9. आने से पहले आ जाती है उनके क़दमों की आहट ...
    उम्दा रचना ...

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (15-05-2013) के "आपके् लिंक आपके शब्द..." (चर्चा मंच-1245) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  11. बहुत खुबसूरत भाव..

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  12. बहुत बढ़िया लगी यह भावपूर्ण रचना |
    आशा

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  13. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति

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  14. बहुत सुन्दर भावमयी रचना...

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  15. टिप्पणियाँ स्पैम में जा रही हैं आपके ...
    स्पैम बोक्स चेक करें ... मेरी टिप्पणी नज़र नहीं आई आज देखा तो ...

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