Thursday, 9 May 2013

हम बेटियों का घर ही धूप में क्यूँ ...!



सहसा उसे

 नानी का कथन

 याद आ गया 

"तेरा ससुराल तो

 धूप में ही बाँध देंगे...!"

जब उसने देखा 

दूर रेगिस्तान में

एक अकेला घर 

जिस पर ना कोई साया 

ना ही किसी 

दरख्त की शीतल छाया ,

एक छोटी सी 

आस की बदली को तरसता

वह घर .......!
और उसमे खड़ी एक औरत ...

तो क्या इसकी नानी भी

 यही कहती थी...?

पर नानी मेरा घर ही 

धूप में क्यूँ ,भाई का

क्यूँ नहीं ....!

शरारत तो वो भी करता है ...

इस निरुत्तर प्रश्न का 

जवाब तो उसने

समय से पा लिया

पर आज फिर 

नानी से यही प्रश्न करने को

मन हो आया
"

हम बेटियों का घर ही धूप में क्यूँ ...!


(चित्र गूगल से साभार )