Saturday, 4 May 2013

साथ छूट गया बरसों के इंतजार का ........

ख़त्म हुआ इंतजार ...!
एक पत्नी का 
एक बहन का 
और 
बेटियों का भी ...! 

इंतजार था 
एक सुबह वह भी आएगी 
जब सूरज उगेगा 
ऐसा भी ,
लाएगा साथ अपने 
एक ख़ुशी की किरण ...

किरणों पर होगा एक पैगाम 
आने का 
उसका जो , उनका अपना प्रिय है 
आँखों का तारा है ,
चला  आएगा राखी के तारों से बंधा 
अब खत्म हो गया इंतजार 
उन राखियों का भी ...

इंतजार था उसे भी 
उस चंदा का ,
जाने कितने करवा -चौथ के 
चाँद वारे होंगे उसकी चाह में 
अब खत्म हो गया इंतजार
 उस चाँद का भी ,
लील गया उसे भी एक गम का 
घना बादल ...!

बेटियां भी रह गयी 
बस ताकती सूनी राह 
तरसी थी बचपन से ही 
जिसकी बाहों में झूला झूलना ,
अब इंतजार था जिन  बाँहों का 
जो डोली में बैठाती 
ख़त्म हो गया उन बाँहों का इंतजार,
 छूट गया साथ ...

साथ छूट गया एक आस का 
बरसों के इंतजार का ........