Wednesday, 1 May 2013

अन्नपूर्णा.....


गहरे सांवले रंग पर

गुलाबी सिंदूर ,

गोल बड़ी बिंदी ...

कहीं से घिसी ,कहीं से

सिली हुई साड़ी पहने

अपनी बेटी के साथ ,

खड़ी कुछ कह रही थी

मेरी नयी काम वाली ..

 मेरी नज़र उस के चेहरे ,
गले और
बाहं पर मार की

ताज़ा -ताज़ा चोट पर

पड़ी 

और दूर तक

भरी गहरी मांग पर भी ...

मैं  पूछ बैठी ,

कितने बच्चे है तुम्हारे ,

सकुचा कर बोली जाने दो

बीबी ...!

क्यूँ ...?

तुम्हारे ही है ...!

या चुराए हुए ,

और तुम्हारा

नाम क्या है ,

बेटी का भी...

वो बोली नहीं -नहीं बीबी ...

चुराऊँगी क्यूँ भला 

पूरे आठ बच्चे है ...!

ये बड़ी है,

सबसे छोटा गोद में है ...

पता नहीं मुझे क्यूँ हंसी

आ गयी 

इसलिए नहीं कि उसके

आठ बच्चे है 

कि

अपने ही बच्चों की भूख

के लिए सुबह से शाम भटकती

"अन्नपूर्णा " और उसकी बेटी

" लक्ष्मी "...!