Friday, 17 May 2013

वह उसकी परछाई ही होती है ...


दुनिया में इंसान का 
हर रिश्ता ,
हर एक सम्बन्ध 
भरा  है
स्वार्थ और मतलब से ...

जो साथ रहती है 
एक सच्चे  मित्र की तरह ,
एक वफादार 
जीवन संगिनी की तरह, 
सुबह से लेकर शाम तक
 वह उसकी परछाई ही 
 होती है ...

यह परछाई 
भरी दुपहरी में उसके 
क़दमों तले रह कर भी 
साथ नहीं छोडती
कभी भी ...

गहरी अँधेरी रात में यह परछाई 
उसके अंतर्मन में 
छुप कर उसे सही 
राह भी दिखलाती है ........