Thursday, 30 May 2013

जिन्दगी तुझसे क्या सवाल - क्या शिकायत करूँ...

जिन्दगी तुझसे क्या
 सवाल करूँ , क्या शिकायत करूँ
तुझसे जैसा चाहा
 वैसा ही पाया ...

फूल चाहे तो फूल ही मिले
फूलों में काँटों की शिकायत
तुझसे क्यूँ करूँ ,
मेरी तकदीर के  काँटों की
 शिकायत  तुझसे क्यूँ करूँ ...

सितारों भरा आसमान
चाहा तो भरपूर सितारे मिले
कुछ टूटे बिखरे सितारों की शिकायत
तुझसे क्यूँ करूँ ,
मेरी तकदीर के टूटे सितारों
की शिकायत तुझसे क्यूँ करूँ ...

जिंदगी हर कदम पर तूने
दिया साथ मेरा ,
मंजिल पर आकर राह भटक  गयी
शिकायत तुझसे क्यूँ करूँ
मंजिल के लिए तरसना मेरी तकदीर
शिकायत तुझसे क्या करूँ ...