Monday, 29 April 2013

पर तुम एक आभास ही तो हो ...


तुमको याद करना

 तुमको ढूँढना ,

हर आहट पर पलट

 कर देखना के तुम

 आ रहे हो शायद ...


पर तुम ,तुम 

तो हो ही नहीं

 एक आभास 

ही तो हो ...


मुझे यूँ भी लगता है
 ,
एक दिन तुम आओगे

 और मेरे कंधे पर धीरे 

 हाथ रखोगे

 मैं पलट कर देखूंगी ,

तुम्हे अपने सामने

 ही पाऊँगी...


मैं इसी आभास 

मैं ही रहती हूँ

 और गुम रहना भी

 चाहती हूँ ...

( चित्र गूगल से साभार )