Wednesday, 10 April 2013

पर मैं अगले जनम में चिड़िया बनना चाहती हूँ .......



उसने धीमे कहा 
क्या अगले जनम में भी 
साथ निभाओगी ...

हाँ शायद !
पर मैं  अगले जनम में
 चिड़िया बनना
चाहती हूँ ,
वो कुछ सोचते हुए बोली ...

इस सुनहरे पिंजरे से 
दूर उन्मुक्त
गगन में उड़ना 
चाहूंगी ...

तुम मुझे कैसे 
पहचानोगे तब ...!

हाँ पहचान लूँगा 
मैं ...!
इस सुनहरे पिंजरे की
आभा  से ,
तुम्हारे परों पर
 तब भी होगी
और
तुम्हारी आवाज़ से  ,
जो अभी भी चिड़िया
 की तरह ही है ...

जब मैं  हाथ बढाऊँ 
तुम मेरी हथेली पर आ
बैठना 
उसने अपनी आँखों की
चमक बढ़ाते हुए 
धीरे से फिर कहा ...