Wednesday, 3 April 2013

सरिता का हठ ...!




सागर का  खारापन 
सरिता का घुलता अस्तित्व,
हारी सरिता 
हठ  पर उतर आयी .......

सागर का अनुनय 
गर घुलती रही 
सरिता उसमे ,
सानिंध्य उसका 
सागर को भी मीठा कर देगा 
 सरिता की मिठास से
छोड़ देगा अपना खारापन ..

सरिता का हठ ...!

अपनी पहचान बनाने का 
धरा की कठोरता 
गगन की तपिश ना 
रोक पाएगी उसे ....

सागर की फैली बाहों को
 कर अनदेखा 
बस चली,इठलाती
अपनी नयी डगर पर .......

 सागर के बिन सरिता का
 अस्तित्व भी क्या ...!

जरा सी तपिश ना  सहन हुई
कुम्हलाई , 
मुरझाई सरिता ...

मुड़ कर देखा जो 
एक बार फिर से 
सागर भीगी आँखे लिए 
बाहें फैलाये 
प्रतीक्षा में था उसकी 
अभी भी ...

सरिता फिर से मुड़ चली
सागर से मिलने ..........

24 comments:

  1. सागर और सरिता एक दूजे बिन अधूरे... सागर में समाकर नदी भी पा जाती है उसकी विशालता... लाजवाब रचना ...आभार

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    1. हार्दिक आभार संध्या जी

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  2. Beautiful words & Picture too. Superb.

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    1. हार्दिक आभार मदन मोहन जी

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  3. एक-दूसरे के साथ परिपूर्णता। एक-दूसरे के बिन अधुरापन। आत्मा और परमात्मा को जो संबंध है वहीं सरिता और सागर का। नदी का निर्माण स्रोत सागर है तो सागर नदी के अस्तित्व पर टिका हुआ है, इस भाव का प्रकटिकरण करने वाली कविता।

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    1. हार्दिक आभार विजय जी

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  4. बहुत सुंदर ......

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  5. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. हार्दिक आभार यशोदा जी

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  6. जीवन एक नदी है
    रचना में जीवन कीं सुंदर सार्थक अनुभूति प्रस्तुति की है---अद्भुत
    बहुत बहुत बधाई

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    1. हार्दिक आभार ज्योति खरे जी

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  7. सागर और सरिता एक दूसरे के पूरक है,,,उम्दा अभिव्यक्ति,,,

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    1. हार्दिक आभार धीरेन्द्र सिंह जी

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  8. सरिता और सागर का मिलन,बेहतरीन भावपूर्ण रचना.

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    1. हार्दिक आभार राजेन्द्र जी

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  9. सरिता की मंजिल सार ही है ... ओर जब तक वो उसमें आत्मसात नहीं होती ... ऐसे ही बहती है ... भावपूर्ण रचना ...

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    1. हार्दिक आभार दिगम्बर नासवा जी

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  10. वाह... बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

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  11. सागर और सरिता का मिलन ही नियति है.बहुत सुन्दर रचना..

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  12. सरिता सागर में मिल अपने असतीतत्व को खत्म कर देती है ...सुंदर अभिव्यक्ति

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  13. दरअसल सरिता की यही नियति है

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  14. सरिता की नियति है सागर से मिलना -सुन्दर रचना
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