Friday, 26 April 2013

दुविधा


दरवाजा बंद कर 
दस्तक भी
 देते हो 
गुम हो कर
 आवाज़
 भी लगाते हो ...

चुप रहने को कह 
नज़रो से सवाल
 भी करते हो 
आखिरी बार
मिलकर ,
मिलने भी चले 
आते हो ...

ये तुम बार -बार ,
हर बार ,
मुझे कैसी 
दुविधा में घुमा 
जाते हो ...