Sunday, 14 April 2013

कुछ वादे तुमने किए थे .......

प्रिय 
कुछ वादे तुमने किए थे 
और कुछ वादे
मैंने भी किये थे तुमसे 
थाम एक दूसरे का हाथ ,
मान अग्नि को साक्षी ...

कुछ वादे किए थे मैंने
अपने आप से
तुम्हारे लिए
मान अपने अंतर्मन को साक्षी ...

साथ तुम्हारा कभी न छोडूंगी
कभी अनुगामिनी तो
कभी सहगामिनी बन
साथ चलूंगी सदा ....

अंधियारे राह में
मुझे ही पाओगे साथ सदा ही
रहूंगी खड़ी तुम्हारी राहों में
बन रोशनी की किरण .......

यही वादा निभाया भी है मैंने
जो किया था मैंने ,
मान अपने अंतर्मन को साक्षी .......

34 comments:

  1. तुमने चाँद उगे आना था,तुमने चाँद ढले जाना था.
    यह तो सच्ची प्रीत नही ,कुछ तो वचन निभाया होता,,,

    Recent Post : अमन के लिए.

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    1. हार्दिक धन्यवाद धीरेन्द्र सिंह जी

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 17/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. हार्दिक धन्यवाद यशोदा जी

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  3. बहुत ही भावपूर्ण बेहतरीन रचना,आभार.

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    1. हार्दिक धन्यवाद राजेन्द्रकुमार जी

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  4. इसी को संबंध कहते हैं ... वादा अपने आप से किया ओर इसी पे उम्र भर टिकना ...

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    1. हार्दिक धन्यवाद दिगंबर नाशवा जी

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  5. बेहतरीन ,वादों के सुमन तो खिलेंगे भी और मुश्कुराएगे भी स्म्रितिओन का भाव पूर्ण झरोखा

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    1. हार्दिक धन्यवाद अज़ीज़ जौनपुरी जी

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  6. समर्पित प्रेम की सुन्दर रचना...

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    1. हार्दिक धन्यवाद कैलाश शर्मा जी

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  7. आपकी इस प्रविष्टि क़ी चर्चा सोमवार [15.4.2013]के चर्चामंच1215 पर लिंक क़ी गई है,
    अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए पधारे आपका स्वागत है | सूचनार्थ..

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    1. हार्दिक धन्यवाद सरिता भाटिया जी

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  8. बहुत सुन्दर भाव... शुभकामनाएं

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    1. हार्दिक धन्यवाद संध्या जी

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  9. सुन्दर रचना...शुभकामनाएं ..........

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    1. हार्दिक धन्यवाद संध्या जी

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  10. वधू और वर बनते एक-दूसरे के साथ वादे तो किए जाते हैं पर अपने आपसे भी होते हैं। शादी नवीन जीवन में प्रवेश तो है और यह नवीन जीवन भारतीय संस्कृति में स्त्री के लिए पूर्णता नवीन होता है। गांव, घर, परिवार, बचपन, आंगन... सब कुछ छोड कर आना पडता है। दायित्व दुगुना हो जाता है- मैके और ससूराल को लेकर। उसकी तुलना में पुरुष थोडा बेफिक्र होता है उसमें दायित्वबोध केवल अपने परिवार को लेकर ही रहता है। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए आपके कविता के भीतर की नववधू वादें कर रही है।
    कविता के साथ जोडी तस्विर ओरिजनल है-25.05.2011 की। हो सकता आपके किसी पारिवारिक सदस्य के शादी की हो। कविता के भाव के साथ एकदम जुडने वाली। अपने-आपसे वादे करती।

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    1. हार्दिक आभार विजय जी अपनी अमुल्य टिप्पणी के लिए ....यह तस्वीर मेरी ही शादी की है ( दी गयी तारीख पर फिर से एडिट की गयी है ) ...अभी २० जनवरी को शादी की २५ वी सालगिरह होने पर लिखी थी लेकिन घर पर ना होने के कारण पोस्ट नहीं की ...

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    2. चलो भाई जिस तर्क पर तस्विर को पहचानने की कोशिश की थी सच निकली। केवल फोटो पर की तारीख के कारण कन्फुजन रहा था और सोच रहा था आपके बेटी और जमाई की होगी पर चेहरा तो आपसे मिल रहा है शायद आपकी होगी मन में आया और फिर नजर पडी तारीख पर। तारीख नई, तो सोचा नहीं यह किसी पारिवारिक सदस्य की होगी। खैर आपको देर से ही भले शादी की 25 वीं सालगिरह मुबारक। और 25 साल पिछे जाकर अपने वादों का दुबारा मूल्यांकन करना बेहतरिन।

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    1. हार्दिक धन्यवाद नीलिमा जी

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  12. बहुत प्यारी रचना!
    ~सादर!!!

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी

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  13. बहुत भावपूर्ण पोस्ट.....तस्वीर भी बहुत अच्छी है.......बधाई हो आपको।

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    1. हार्दिक आभार इमरान अंसारी जी

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  14. बेहतरीन रचना

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    1. हार्दिक आभार शांति जी

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  15. बहुत सुन्दर तस्वीर ...और रचना तो अति भावपूर्ण .प्रेम से परिपूर्ण ....पत्नी के उद्गार ..अति सुन्दर ..
    शुभ कामनाएं .

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    1. हार्दिक आभार महेश जी , मंजू जी

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  16. बहुत प्यारे भाव...इसे रचना कैसे कहूँ...
    बहुत सुन्दर!!!

    अनु

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  17. जीवन में साथ चलने का वादा और प्रेम का कोमल अहसास
    बहुत सुंदर रचना
    बधाई

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  18. बेहतरीन रचना उपासना जी ................
    ह्रदय की आवाज़ ..........

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