Sunday, 14 April 2013

कुछ वादे तुमने किए थे .......

प्रिय 
कुछ वादे तुमने किए थे 
और कुछ वादे
मैंने भी किये थे तुमसे 
थाम एक दूसरे का हाथ ,
मान अग्नि को साक्षी ...

कुछ वादे किए थे मैंने
अपने आप से
तुम्हारे लिए
मान अपने अंतर्मन को साक्षी ...

साथ तुम्हारा कभी न छोडूंगी
कभी अनुगामिनी तो
कभी सहगामिनी बन
साथ चलूंगी सदा ....

अंधियारे राह में
मुझे ही पाओगे साथ सदा ही
रहूंगी खड़ी तुम्हारी राहों में
बन रोशनी की किरण .......

यही वादा निभाया भी है मैंने
जो किया था मैंने ,
मान अपने अंतर्मन को साक्षी .......