Saturday, 5 October 2013

आखिर रंग ही डाला पक्के वाले रंग में .....

रंगरेज  को जब मैंने देखा
रंगते हुए दुपट्टा
तो सोचा
कितनी मुश्किल है रंग का चढ़ना
वह भी
पक्का वाला रंग ....

श्वेत आत्मा सा श्वेत  दुपट्टा
और
उस पर पक्का रंग  ....

रंगरेज ने भी तो
दुपट्टा
उबलते रंग में डाला
फिर रंग डाला
घूमा  -घूमा  कर
उठा -पटक कर
गर्म से ठन्डे पानी से गुजारता
आखिर रंग ही डाला
पक्के वाले रंग में  .....

ऐसे ही पक्के वाले रंग में
मेरा मन भी तूने
रंग डाला होगा एक दिन ,
ना जाने
कितने उबलते - ठन्डे
अहसासों से गुजरना पड़ा होगा
मेरी श्वेत आत्मा को
और रंग गयी
ना छूटने वाले पक्के रंग में .....