Thursday, 24 October 2013

हवाएं ले आती है जवाब में मुस्कान ...

हवाओं पर लिखी
चिट्ठियाँ
और उनके जवाब
लाती भी हवाएं ही हैं

चिट्ठियों का जवाब
आएगा ही
यही उम्मीद फिर से
मजबूर कर देता है
 चिट्ठी लिखने को

हवाएं ले आती है
 जवाब में मुस्कान ,
मुस्कान से क्या अर्थ !
हर शब्द बोलता है जैसे ,
मुस्कान भी भेद खोल देती है
कभी -कभी या हमेशा
शायद  वैसे ही

मुस्कान कभी रुकने का
कभी पलट कर देखने
कभी आगे बढ़ने को
या फिर
आगे बढ़ जाने का संकेत करती ,
कभी -कभी ये मुस्कान
रुला भी जाती

आंसू से नम चिट्ठी से
हवा भी नम हो उठती
एक भीगा सा सन्देश ले उड़ती है
फिर से जवाब की आस लिए