Thursday, 24 October 2013

हवाएं ले आती है जवाब में मुस्कान ...

हवाओं पर लिखी
चिट्ठियाँ
और उनके जवाब
लाती भी हवाएं ही हैं

चिट्ठियों का जवाब
आएगा ही
यही उम्मीद फिर से
मजबूर कर देता है
 चिट्ठी लिखने को

हवाएं ले आती है
 जवाब में मुस्कान ,
मुस्कान से क्या अर्थ !
हर शब्द बोलता है जैसे ,
मुस्कान भी भेद खोल देती है
कभी -कभी या हमेशा
शायद  वैसे ही

मुस्कान कभी रुकने का
कभी पलट कर देखने
कभी आगे बढ़ने को
या फिर
आगे बढ़ जाने का संकेत करती ,
कभी -कभी ये मुस्कान
रुला भी जाती

आंसू से नम चिट्ठी से
हवा भी नम हो उठती
एक भीगा सा सन्देश ले उड़ती है
फिर से जवाब की आस लिए


14 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (26-10-2013) "ख़ुद अपना आकाश रचो तुम" चर्चामंच : चर्चा अंक -1410” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  2. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीया-

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  3. bahut sundar prastuti... muskaan laati rachna :)

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  4. मुस्कराहट के भी कितने रंग...... बहुत बढ़िया

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  5. कोमल भावपूर्ण रचना...
    :-)

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  6. ये विजेट सफलतापूर्वक अपने ब्लॉग पर स्थापित करने के बाद "टिप्स हिंदी में" ब्लॉग पर टिप्पणी अवश्य दें |


    सशक्त बिम्बात्मक अभिव्यक्ति हवाओं के नाम

    हवाओं पे लिख दो हवाओं के नाम ...

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  7. बहुत खुबसूरत रचना .....

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  8. हृदयस्पर्शी रचना उपासना जी

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  9. बेहद संवेदनशील मन की कहानी..., प्रभावशाली !!

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  10. बहुत सुंदर और उम्दा अभिव्यक्ति...बधाई...

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  11. खुबसूरत रचना ...उपासना जी

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  12. उम्दा उपासना जी

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