Wednesday, 9 October 2013

माँ तुम हमेशा याद आती हो ....

माँ तुम हमेशा 
 याद आती हो 
जब कि मैं जानती हूँ ,
तुम मुझसे 
दूर नहीं हो मेरे आस पास ही 
तो रहती हो …

जब आईना देखती हूँ ,
 आईने में तुम 
मेरी चोटियाँ गूंथती नज़र 
आती हो ,
जब खाने बैठती हूँ माँ ,
तुम अपने
हाथों से खिलाती दिखाई देती हो …

जब कभी तवे पर 
रोटी की  जगह
उंगलियाँ सेक लेती हूँ ,
तो माँ तुम
झट से हाथ अपने हाथों में लेकर
फूंक मारती नज़र आती हो
और ये फूंक हाथों ही नहीं मेरे
दिल को भी मरहम लगा जाती है …

और माँ ,
जब उदास होती हूँ तो,
मुट्ठी में धीरे से मुस्कान थमा जाती हो,
पर माँ आज मुझे तुम्हारी बहुत याद
आ रही है , 
और मुझे पता है तुम ,
मेरे आस पास ही रहती हो ...