Friday, 27 December 2013

ये नीला रंग दहशत देता है मुझको

ये नीला रंग
दहशत देता है मुझको
हटा लो
इसे मेरी नज़रों से

ये नीला रंग
मेरे रक्त को
बहती हुई रगों को
ज़मा सा  जाता है
बुझदिल बनता जाता है

खुला विस्तृत
ये नील गगन
और
इसका नीला रंग
चुभता है मुझे
चुंधिया जाता है मेरी नज़रें ...

आखिर कब तक रखूं
बंद आँखे
ढांप क्यूँ नहीं लेता
इसे कोई बादल का टुकड़ा
मगर
कुछ दिन के बादल
और फिर से
धमकाता - गरियाता
नीला - गगन ...

इस नीले रंग की दहशत में
फीके पड़ जाते हैं
धनक के सात रंग ,
फीके पड़ते रंगों में
एक ही रंग उभरता है
नीला रंग ...

इस  नीले  रंग से
नफरत की  हदों से भी आगे
नफरत है मुझे
हटा दो मेरी नज़रों से इसे ...