Sunday, 15 December 2013

तुम बिन सब सूना -सूना ...


तुम बिन कौन सजन अब मेरा 
 जैसे  फूल सूरजमुखी सा 
मुरझाया अब मन मेरा भी 
घर -आँगन और मन का कोना 
तुम बिन सब सूना -सूना 

तुम बिन कौन सजन अब मेरा 
मद्धम हुआ जैसे चाँद गगन में 
अंधियारे में खोया 
अब मन मेरा भी 
घर -आँगन और मन का कोना 
तुम बिन सब सूना -सूना 


गए परदेस जब से तुम साजन 
भर आते नयन पल -पल 
पल -छिन तुम्हारी डगर निहारूं 
घर -आँगन और मन का कोना 
तुम बिन सब सूना -सूना 

एक बार तो मुड़ कर देखा होता 
जैसे कुम्हलाई सी लता 
 व्याकुल अब मन मेरा भी
घर -आँगन और मन का कोना 
तुम बिन सब सूना -सूना 

तुम बिन कौन सजन अब मेरा 
अब तो घर आ जाओ सजन