Monday, 23 December 2013

ये पर्वत मुझे ऐसे लगे ,जैसे ...


ये पर्वत,
सफ़ेद रुई जैसी बर्फ से घिरे
मुझे ऐसे लगे 

जैसे ...

बूढी नानी की गोद 
जिसमे बैठ कर ,
कहानी सुनते -सुनते सो जाएँ ...

जैसे...

माँ की गोद
जहाँ बैठ 
सारी थकान भूल जाएँ ........

जैसे...

 पिता का सा
मजबूत सहारा ,
जहाँ हर दुःख दूर हो जाये ...

जैसे ...

प्रियतम का साथ
जिसके आगोश में
 हर गम भुला दें ...

10 comments:

  1. बहुत ही सुंदर ,
    पिता का सा मजबूत सहारा, जहाँ हर दुःख दूर होजाये ... आ० धन्यवाद

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २४/१२/१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी,आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है।

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  3. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन बदसूरत बच्चा और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  4. बहुत उम्दा रचना |सुन्दर बिम्ब |
    आशा

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  5. खूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  6. खूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  7. Kisi ne un parbaton ko safed jata wala sadhu bataya tha jo sansar tyag chuka hai.. Aapne to use parivar ka sadasya bana daala.. Bahut pyari kavita..

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  8. रिश्तो का बन्धन और निरूपण

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