प्रेम
तुम आशा हो
मन की प्रिया हो
तन-मन को जो बांधे
वो एकता हो।
प्रेम
तुम नील -गगन की
नीलिमा में हो
मन की अपार शांति में हो।
प्रेम
बस तुम हो
कभी -कभी ही नहीं
हमेशा ही कायम हो।
तुम आशा हो
मन की प्रिया हो
तन-मन को जो बांधे
वो एकता हो।
प्रेम
तुम नील -गगन की
नीलिमा में हो
मन की अपार शांति में हो।
प्रेम
बस तुम हो
कभी -कभी ही नहीं
हमेशा ही कायम हो।
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