Thursday, 6 March 2025

सिर्फ तुम से

कुछ कहना था
कुछ सुनना भी था
बहार का इंतजार था।

न कुछ कहा 
न कुछ सुना 
बहार चली गई।

अब फिर से बहार का इंतजार है 
कुछ सुनने के लिए
कुछ कहने के लिए ...

6 comments:

  1. गहन भावाभिव्यक्ति।
    सादर।
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    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ७ मार्च २०२५ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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    1. हार्दिक आभार

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  2. जय श्री राधे

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  3. सुंदर सृजन

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  4. पढ़कर मन में हल्की सी उदासी और उम्मीद दोनों महसूस हुई। आपने बहुत कम शब्दों में वही भाव पकड़ा जो अक्सर हम खुद महसूस करते हैं, कुछ कहना है, कुछ सुनना है, पर समय या मौके की कमी।

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