Saturday, 17 January 2015

हायकू ( बून्द )

1)
शशि किरण
बनी ओस की बून्द
चातक मन

2)
झिलमिलाती
चपल बालक सी
चंचल बूंदे

3)
कोमल छवि
कर पर कांपती
मोती सी बूंदे

4)
 बेबस मन
बरसती है बिन
बरखा बूंदे