Thursday, 1 January 2015

बात करें हम कल ही की...

नए साल में
कल की बात
क्यों ना करें ,
कल से ही तो आज है....

कल थोड़ा गम था
आज खुशी की आशा है।
कल अंधकार था
आज रोशनी की ओर बढ़ते कदम है....

कल, कल - कल बहती नदिया थी
आज नदिया का सागर
बन जाने की तमन्ना है.....

कल की परछाई जब आज है ,
फिर क्यों ना करें
बातें कल की ,
आज का दिन भी
बन ही जाएगा कल। 

बात करें हम कल ही की
आने वाले कल की
आज की मुस्कान के
कल खिलखिलाहट बन जाने की...