Monday, 1 July 2013

पूनम के चाँद का इंतजार है मुझे ...

अब तुम्हें क्या बताऊँ 
कितना इंतजार करती हूँ 
तुम्हारा 
और तुम हो कि  
 अपना चेहरा दिखला  कर 
फिर से गुम हो जाते हो ...

सोचा था 
इस बार जब तुम आओगे 
थाम कर हाथ तुम्हारा 
छत पर ले कर जाऊँगी ...

और कह दूंगी 
अपने मन की बात 
तुम्हारा चेहरा नहीं देखा जाता 
अब मुझसे  चाँद में ...

अब 
आंचल में 
बाँध कर 
चाँद को ही 
रखना पास रखना  हैं ...
 तुम तो चंद्रमाँ  की 
बढती कलाओं 
की तरह आये 
घटती कलाओं की 
तरह चले गए ...
छोड़ गए बस यादों 
और इंतजार की
काली अमावस की रात ,
अब   फिर से तुम्हारे 
साथ -साथ 
पूनम के चाँद का 
इंतजार है मुझे ...
( चित्र गूगल से साभार )