Thursday, 4 July 2013

याद में बसी चंपा के फूलों की महक

याद में बसी
चंपा के फूलों की  महक
अब भी महका जाती है
मुलाकात तुमसे
पहली -पहली ,
पहले -पहल जब
मिले थे चंपा की छाँव में
शाम के धुंधलके में ...

थोडा सकुचाये तुम
घबराई सी थी
मैं भी
निशब्द ताकना तुम्हारा
बोलती आँखों से
लब खामोश थे ...

सहसा चंपा के फूल
का गिरना  ,
फूल तो बहाना था
मानो मिला एक जरिया
तुम्हे मुझसे बतियाने का ...

हाथ में फूल
लबों पर मुस्कान
आँखों में प्रेम ,
याद है वो पल - घड़ी
मुझे अभी भी - आज भी
क्या तुम्हें भी है याद ...

याद मुझे तो है
वह तुम्हारी मुस्कान
फूल का मेरी तरफ बढ़ाना
जाने तुम फूल दे रहे थे
या मेरी तरफ हाथ बढा रहे थे ...

चंपा के फूल में बसा
तुम्हारा प्रेम
तुम्हारी छुअन
तुम्हारा मूक प्रेम -निवेदन
मुझे महका जाता है
आज भी -अभी भी
जब भी चंपा के पेड़ को
ताकती  हूँ ...

क्या तुम्हे भी याद है
वो महक ,
वह छुअन
या तुमने भी भुला दिया
चंपा तले वो महकी हुयी सी
पहली मुलाकात ...