Friday, 5 July 2013

बिन बैसाखियों के कहाँ चल पाती औरतें ...!

औरतों को मैंने नहीं देखा
चलते हुए कभी
उनको अपने पैरों पर 
चलती हैं वो सदा 
बैसाखियों के सहारे ही ...

चलती हैं वे बचपन में 
पिता का सहारा लिए 
भाई का सहारा लिए ...

बिन सहारे 
भयभीत होते चलती ...

यह बैसाखियाँ गवां देता है 
उनका आत्मविश्वास 
स्वाभिमान 
और निज पहचान भी ..

फिर कहाँ चल पाती
बिन सहारे वे 
तभी तो डोली में बैठा कर 
विदा की जाती है 
उतरते ही थमा दी जाती है 
नयी बैसाखियाँ ...

यह नयी बैसाखियाँ  लिए 
चलते हुए 
घुलती रहती है 
ग़लती रहती है , वे ...!

कभी गिरती तो
 कभी लड़खड़ाती 
भरभरा के गिरने को 
होती है , तभी 
उग आती है एक और
 बैसाखी ...

चलना तो पड़ता ही  है
लेकिन ...!
बिन बैसाखियों के कहाँ 
चल पाती औरतें ...!


(चित्र गूगल से साभार )

18 comments:

  1. chalna to padta hai na ............ nice very nice

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  2. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती,अभार।

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  3. नारी समस्या को सही उकेरा..

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  4. चलाना तो है बैसाखी नहीं भी होतो लंगड़ा कर ही सही ....पर कही कही अपवाद भी देखे गए है |

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  5. बिलकुल सही, आभार


    यहाँ भी पधारे ,
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_5.html

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  6. बिन बैसाखियों के कहाँ चल पाती हैं औरते ......बिल्कुल सही कहा आप ने .. बहुत सुन्दर, बधाई आप को

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (07-07-2013) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/“ मँहगाई की बीन पे , नाच रहे हैं साँप” (चर्चा मंच-अंकः1299) <a href=" पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. मैं भी कितना भुलक्कड़ हो गया हूँ। नहीं जानता, काम का बोझ है या उम्र का दबाव!
    --
    पूर्व के कमेंट में सुधार!
    आपकी इस पोस्ट का लिंक आज रविवार (7-7-2013) को चर्चा मंच पर है।
    सूचनार्थ...!
    --

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  9. बहुत बढ़िया प्रस्तुति

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  10. और जो चलना चाहती है , स्वच्छंद की पदवी पाती हैं !
    स्त्रियों के जीवन पर सटीक पंक्तियाँ !

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  11. kavitaachchhi hai ----- par sirf rone se kyaa....kya samadhan ho ???

    --- Bachapan men sabhi ko baisakhi chaliye hoti hai ..par bad men use surakska- paramarsh ki bhanti soch samajh kar apanana chahiye...

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  12. नारी की पीड़ा का मार्मिक और सार्थक चित्रण किया है आपने। बहुत बहुत बधाई।

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  13. parivarik saath hamesha vaishakhi nahi hota mere vichar se. pita aur bhai ki to ijjat hi hoti hai mahilaye usake baad patiyo ko to patni ki beijjati hone par apani jaan bhi gavaani padati hai kai bar.

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  14. सही.;मगर अब बदलाव आने लगा है...

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  15. सच तो यही है ...
    मंगल कामनाएं !!

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