Tuesday, 18 February 2014

जब से जिंदगी को देखा करीब से ...




मौत कितनी आसान है
और
जिंदगी कितनी कठिन
ये कठिनता पार कर ही तो
आसानी मिलती है


कौन अपना
  कौन पराया यहाँ ,                          
सबके सब है यहाँ
   नकाब -धारी

नकाबों से झांकती
आँखों में
जब से  देखा भय
जिंदगी के लिए
भय दूर हो गया मौत का

भय नहीं लगता है
मुझे अब  ,
जब से जिंदगी को देखा
करीब से

मौत ही अपनी सी लगी
एक दिन उसकी गोद ही तो मंज़िल है
अच्छी और सच्ची !

अभी तो जिन्दा रहना है
कुछ बरस और मुझे ,
मांगने से भी
मौत मिली है कभी !

चाँद -सितारों ,
ग्रह - नक्षत्रों से
उलझी जिंदगी अभी और
बितानी है मुझे ....!