Tuesday, 11 June 2013

तेरा नाम गुनगुनाने की चोरी तो करते हैं अभी भी ...


तुझसे ना मिलने की
कसम खाई थी कभी ,
पर ख्वाबों में मिलने की
 चोरी तो करते हैं
अभी भी ...

खुद को चार दीवारी में
रखने की कसम
खाई थी कभी ,
पर  दीवार की
  खिड़की से  तुझे
ताकने की चोरी तो करते हैं
अभी भी ...

तेरा नाम भी जुबां पर
 ना लाने की कसम
खाई थी कभी ,
पर गीतों के बहाने
तेरा नाम गुनगुनाने
की चोरी तो करते हैं
अभी भी ...

23 comments:

  1. अच्छी रचना
    बहुत सुंदर

    मीडिया के भीतर की बुराई जाननी है, फिर तो जरूर पढिए ये लेख ।
    हमारे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर। " ABP न्यूज : ये कैसा ब्रेकिंग न्यूज ! "
    http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/abp.html

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  2. बेहतरीन रचना

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  4. बहुत बेहतरीन
    ऐसी चोरी की कोइ सज़ा नही

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  5. आपकी यह रचना कल गुरुवार (13-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  6. प्यार में कसम खाते है तोड़ने के लिए - बढ़िया प्रस्तुति
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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  7. लयात्मक और भावुक प्रस्तुति मानो कोई छोटा पानी का झरना बह रहा हो और उसके बहने की गुंज घटों सुनने का मन कर रहा हो।

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  8. वाह! बहुत कोमल अहसास...

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  9. प्रेम के अहसास से सजी लेखनी

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  10. बहुत खुबसूरत भाव लिए रचना

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  11. आपकी यह प्रस्तुति कल चर्चा मंच पर है
    धन्यवाद

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  12. कोमल अहसासों से सजी कमनीय सी कृति ! बहुत सुंदर !

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  13. बहुत खूब। बधाई।।

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  14. बहुत प्यारी है ये चोरी ....करते रहना

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  15. बहुत सुन्दर...

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  16. कितना बचेंगी , इतना तो चलेगा !

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  17. वाह . बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  18. मन के भीतर पनप रहे प्रेम को व्यक्त करती सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

    आग्रह है- पापा ---------

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  19. चोरी करतें है क्यूँ की जिंदा है तू मुझ मे ......अभी भी.

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