Tuesday, 11 June 2013

तेरा नाम गुनगुनाने की चोरी तो करते हैं अभी भी ...


तुझसे ना मिलने की
कसम खाई थी कभी ,
पर ख्वाबों में मिलने की
 चोरी तो करते हैं
अभी भी ...

खुद को चार दीवारी में
रखने की कसम
खाई थी कभी ,
पर  दीवार की
  खिड़की से  तुझे
ताकने की चोरी तो करते हैं
अभी भी ...

तेरा नाम भी जुबां पर
 ना लाने की कसम
खाई थी कभी ,
पर गीतों के बहाने
तेरा नाम गुनगुनाने
की चोरी तो करते हैं
अभी भी ...