Saturday, 11 February 2012

तुम्हारा नाम


 तुम्हारा नाम मैंने पत्थर
  पर नही लिखा था 
पत्थरों पर लिखे नाम
वक्त के साथ धुंधला
 जाते है ...

मैंने तुम्हारा नाम ,
सागर किनारे लिखा था 
सागर के किनारे की रेत पर
लिखे नाम 
कभी नहीं मिटते ...

वे नाम
लहरों के साथ
सागर में ही  मिल
जाते है ...

 हर लहर के साथ 
बहते रहते है
ना घुलते है
ना गलते है 
इसीलिए सागर का 
पानी भी खारा होता है 
वो नाम आंसुओं से 
जो लिखे होते है ...

कभी अंजुरी भर कर
 देखोगे  या 
किसी लहर पर 
कोई किरण को झिलमिलाती
देखोगे
तुम्हे लिखा नज़र आएगा
 तुम्हारा नाम ...