Wednesday, 1 February 2012

माँ के हाथ का गुलाबी स्वेटर

पार्सल में माँ के
हाथ का बुना

गुलाबी स्वेटर ,
नर्म -मुलायम सा ,
बिलकुल
माँ के दिल जैसा .........

ऊन के गोले को जाने
 कितनी बार अपने गालों से
छुआया होगा माँ ने ,
चुभन वाली ऊन को
वह नहीं चुनती मेरे लिए ......

दुनिया भर की चुभन से अब भी
बचा लेना चाहती है मुझे ....

अब भी नहीं समझना चाहती
उम्र और समय ने मुझे भी बड़ा
बना दिया है ...............

कमजोर होती निगाहों को
चश्मा उतार कर ना जाने
कितनी बार पोंछा होगा ...

एक -एक फंदे ,
डिजाइन में प्यार
और ममता डाल कर बुने इस
स्वेटर में कितनी गर्माहट है ....
ये तो वही बता सकता है
जिसने माँ के हाथो से बुना
 स्वेटर पहना हो ......