Wednesday, 1 February 2012

माँ के हाथ का गुलाबी स्वेटर

पार्सल में माँ के
हाथ का बुना

गुलाबी स्वेटर ,
नर्म -मुलायम सा ,
बिलकुल
माँ के दिल जैसा .........

ऊन के गोले को जाने
 कितनी बार अपने गालों से
छुआया होगा माँ ने ,
चुभन वाली ऊन को
वह नहीं चुनती मेरे लिए ......

दुनिया भर की चुभन से अब भी
बचा लेना चाहती है मुझे ....

अब भी नहीं समझना चाहती
उम्र और समय ने मुझे भी बड़ा
बना दिया है ...............

कमजोर होती निगाहों को
चश्मा उतार कर ना जाने
कितनी बार पोंछा होगा ...

एक -एक फंदे ,
डिजाइन में प्यार
और ममता डाल कर बुने इस
स्वेटर में कितनी गर्माहट है ....
ये तो वही बता सकता है
जिसने माँ के हाथो से बुना
 स्वेटर पहना हो ......


11 comments:

  1. Dil chhu liya Upasna sakhi
    Bahut Pyari hai ye Nayi Udaan
    Badhai ho

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया सखी रमा.........

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  2. चार बजे उठा कर पढ़ने बिठा कर ,
    अपने हाथो में स्वेटर बुनती और मेरे
    लिए आँखों में ख्वाब बुनती दिखी माँ ....

    bachpan ki yaad dila dee aapne ... meri mummy bhi 4 baje uthkar humen padhne ke liye jagakar sweter bunti thi ...:) bahut sundar rachna ...!!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया शोभा जी ,माँ सभी की ऐसी होती है आपकी ,मेरी सभी की ........

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    2. kya baat hai......palke bhigo di aapne....gam se nahi.sneh se.........badhai.....

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  3. स्वेटर नही माँ आई थी मैने ये बात किसी को नही बताई थी

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  4. हर ताने बाने के साथ ,माँ के हाथ का स्पर्श -प्यार .........बहुत शुक्रिया अपर्णा जी .

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  5. माँ ने ना जाने कितनी बार अपनी कमजोर होती ..........
    फिर से उनमे अपनी ममता भरकर ...

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