Sunday, 28 December 2014

हायकू ( गांव )

गांव की बाला
नहीं है  मज़बूर
थामे पुस्तक

नया ज़माना
नयी है तकनीक
खुश किसान


8 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (30-12-2014) को "रात बीता हुआ सवेरा है" (चर्चा अंक-1843) "रात बीता हुआ सवेरा है" (चर्चा अंक-1843) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर और सार्थक हाइकु...

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  3. सुन्दर हायकू

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  4. नया ज़माना
    नयी है तकनीक
    खुश किसान
    सुन्दर हायकू

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