Saturday, 31 May 2014

मैं उदास हूँ..

पानी में पानी का रंग
तलाशना
जता देना है कि
मैं उदास हूँ।

ख़ुशी में ग़म
तलाशना
जता देना है कि
मैं उदास हूँ।

ऊँची पहाड़ियों पर
घाटियों को निहारना
जता देना है कि
मैं उदास हूँ।

इन्द्रधनुष के रंगों पर
काली लकीर खींचना
जता देना है कि
मौन उदास हूँ।

कहते हुए शब्दों पर
लगा कर पूर्णविराम।
चुप हो जाना
जता देना है कि
मैं उदास हूँ।







14 comments:

  1. बढ़िया लेखन व बेहतरीन रचना , उपासना जी धन्यवाद !
    I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  2. इस उदासी के सबब को बाखूबी बयाँ किया है ...

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  3. और मेरे पूछने पर भी कोई उत्तर न देना जता देगा कि तुम उदास हो । बहुत खूब बयाँ उपासना जी

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  4. और मेरे पूछने पर भी कोई उत्तर न देना जता देगा कि तुम उदास हो । बहुत खूब बयाँ उपासना जी

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (02-06-2014) को ""स्नेह के ये सारे शब्द" (चर्चा मंच 1631) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  6. मै उदास हूँ ... बहुत सुन्दर

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  7. ख़ुशी में ग़म
    तलाशना
    जता देना है कि
    मैं उदास हूँ।
    सुन्दर रचना सुन्दर अभिव्यक्ति

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  8. और कविताओं के ज़रिये बेचैनियों का बहार आना...जता देता है कि मैं उदास हूँ। सुंदर रचना...

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  9. UDASI KO KITNI KHUBSURATI SE SHABDON KA JAMA PAHNAYA....

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  10. Karna kuch ho jaaana kuch...jta hi deta hai udaasi... Sunder rachna..

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  11. बेहद मर्म स्पर्शी

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