Wednesday, 28 May 2014

यह जीवन हर दिन आस भरा

यह जीवन
हर दिन आस भरा
उम्मीद भरा
भोर से साँझ तक।

हर रोज़ एक आस
उदित होती है
सूर्य के उदय के
साथ - साथ।

छाया सी डोलती
कभी आगे चलती है
कभी लगता है
दम तोड़ देगी
क़दमों तले
भरी दोपहर में।

नज़र आती है
हथेलियाँ खाली सी
लेकिन
दिन ढले
चुपके से दबे पाँव
पीछे से आ
कन्धों पर हाथ रख देती है।


 रात्रि के  घोर अँधेरे में  ,
निद्रा में भी
आस
पलती है स्वप्न सी।

आस -उम्मीद से
भरा जीवन ही
देता है जीने की प्रेरणा।