Monday, 11 November 2013

जब तुम मुझसे जुदा हुए थे ....

जब तुम मुझसे जुदा हुए थे
तब मैं उदास मुख और 

भरी आँखों से
तुम्हे जाते हुए 

ठीक से न देख पाई,
और ना ही मुस्कुरा पाई थी ...


सोचती हूँ लेकिन 

 अब भी जब तुम मिलोगे 
मुझे कभी जब भी 
तो मैं 
तुम्हें क्या ठीक से देख भी पाउंगी
और मुस्कुरा भी तो कहाँ  पाऊँगी
क्यूँ कि 

अब तो 
लगा है आँखों पर चश्मा
और मुहं में नकली दांत ...


( चित्र गूगल से साभार )

13 comments:

  1. गजब अभिव्यक्ति -
    शुभकामनायें आदरेया-

    आँसू से धुंधला गए, वे विछोह परिदृश्य |
    जब सुदूर चल ही गए, यादें भी अस्पृश्य ||

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  3. बहुत सुन्दर

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  5. बहुत ही बेहतरीन रचना...
    :-)

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  6. पर पहचान तो दिल से होगी जहां न चश्मा होता है न नकली दांत ...
    गहरा एहसास लिए भाव ...

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  7. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :- 14/11/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक - 43 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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  8. आदरणीय , उपासना जी बहुत बढ़िया , कहने को छोटी सी रचना लेकिन बात बड़ी कह गयी , जै हो , धन्यवाद
    समय मिले तो एक सूत्र --: श्री राम तेरे कितने रूप , लेकिन ?

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  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति | बधाई आप को

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  10. आपकी इस रचना के मूल मे जो छुपा हुआ आशावाद है वो काबिले तारीफ है ........ कि अभी भी मिलेंगे कहीं !

    बहुत बहुत साधुवाद .....

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