Thursday, 14 November 2013

तुम्हारा नाम मुझे तुमसे भी अच्छा लगता है

तुमसे भी अच्छा 
तुम्हारा नाम लगता है 
मुझे 
जो रहता है 
मेरे आस -पास ही
महका -महका सा ...

 जब धीमे से गुनगुनाती हूँ 
तुम्हारा नाम
 हवा में घुल कर
 महका जाता है  हवा को ...

कभी -कभी  मुझे ,
खिड़की से झांकती 
रेशमी - मुलायम सी ,
सुबह के  सूरज की
 पहली किरण सा लगता है ...

सर्द रातों में 
गर्म लिहाफ सा 
तुम्हारा नाम मुझे तुमसे भी 
अच्छा लगता है ...