Saturday, 23 November 2013

कभी -कभी कुछ नाम

कभी -कभी कुछ नाम
कुछ कमज़ोर दीवारों पर
 उकेर कर मिटा दिए जाते हैं
निशान तो फिर भी रह जाते हैं
उन कमज़ोर दीवारों की  सतह पर
वक्त गुज़रते  - गुज़रते
धुंधलाते कहाँ है वे नाम ...

मिटाये नामों को
उँगलियों से छू कर उकेर दिया जाय
वे  उभर आते हैं फिर से
उग आते हैं
कंटीली नागफनियाँ की तरह
कमज़ोर दीवारों की सतहों पर ...

खरोंचते रहते हैं
हृदय की  मज़बूत दीवारों को
धीरे -धीरे रिसता लहू
हृदय की  दीवारों पर ही लिपटता रहता ,
 होठों पर मुस्कान ,हृदय में पीड़ा
बन उभरते रहते हैं वे नाम ...