Friday, 22 March 2013

तलाश फिर भी जारी है.......

कितने चेहरे
हैं आस -पास
इन चेहरों की भीड़ में
तलाश ,
एक अपने से
जाने पहचाने चेहरे की

तलाश
एक पहचानी सी
मुस्कान की
जो मिले ,लिये
आँखों में वही जान -पहचान

तलाश
पूरी कब होती है
समय बदलता है
चेहरे बदल जाते हैं ...

तलाश
फिर भी कायम है
इस
बदलते समय में ,
एक अपनेपन की
उन्हीं बदले हुए चेहरों में

कभी-कभी  यह
तलाश
कभी भी ख़त्म नहीं होती

तलाश
खत्म भी कैसे हो
जब वही जाने -पहचाने
चेहरे
मिल कर भी नहीं मिलते ,
फिर रहे हों अजनबियत
का मुखोटा पहने ......

तलाश
फिर भी जारी है
इंतजार भी है उन
अजनबियत के
मुखोटों के उतरने का .....




41 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 23/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत शुक्रिया यशोदा जी

      Delete
  2. sahi kaha.....aajkal kuch jyada hi aisa hone laga hai.....umda rachna

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत शुक्रिया रेवा जी

      Delete
  3. बढ़िया रचना | बेहतरीन | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत शुक्रिया तुषार राज जी

      Delete
  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (23-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार वंदना जी

      Delete
  5. बहुत बेहतरीन अभिव्यक्ति,सुंदर रचना,,,के लिए बधाई उपासना जी

    RecentPOST: रंगों के दोहे ,

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार धीरेन्द्र जी

      Delete
  6. बहुत सुन्दर भाव खुबसूरत प्रस्तुति उपासना जी !
    latest post भक्तों की अभिलाषा
    latest postअनुभूति : सद्वुद्धि और सद्भावना का प्रसार

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार कालिपद जी

      Delete
  7. खुबसूरत रचना ,सुन्दर लेखन

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार अज़ीज़ जौनपुरी जी

      Delete
  8. उपासना जी अच्छी रचना।
    'तलाश फिर भी जारी है' हम अपने आस-पास अपनों की तलाश करते हैं। कहीं कोई हरियाली हो जिससे मन को सुख, शांति, समाधान मिले। इस तलाश में मनुष्य अपनी जिंदगी लगाता है।
    सुंदर कविता लिखते रहें।

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार विजय जी

      Delete
  9. आज अपनों के चेहरे पर भी अजनबीयत के भाव...फिर भी तलाश भीड़ में एक चेहरे की जो अपना हो...बहुत भावपूर्ण रचना...

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार कैलाश शर्मा जी

      Delete
  10. एक नई उड़ान की तलाश

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार अंजू जी

      Delete
  11. Replies
    1. हार्दिक आभार शांति जी

      Delete
  12. बदलते हुए रूपों में हर चेहरा अजनबी लगता है -कभी-कभी तो अपना भी!

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार प्रतिभा जी

      Delete
  13. बहुत बहुत सुन्दर तलाश |बधाई |होली पर हार्दिक शुभ कामनाएं पहले से ,ही क्यूं की मैं बाहर जा रही हूँ |
    आशा

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार आशा जी

      Delete
  14. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति,आभार.

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार राजेन्द्र कुमार जी

      Delete
  15. Replies
    1. हार्दिक आभार अवन्ती जी

      Delete
  16. Replies
    1. हार्दिक आभार सरिता जी

      Delete
  17. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार ओंकार जी

      Delete

  18. बहुत सुन्दर ...
    पधारें "चाँद से करती हूँ बातें "

    ReplyDelete
  19. तलाश ही तो जीवन में रवानगी है ......

    ReplyDelete
  20. खुबसूरत अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  21. बहुत ही बेहतरीन रचना...

    ReplyDelete
  22. जिंदगी भर चलती है ये तलाश ...
    बहुत खूब ...

    ReplyDelete
  23. talash kabhi na kahtm hone wali prkriya ......lajbab rachana ke liye aabhar Upasana ji .

    ReplyDelete