Wednesday, 13 March 2013

तुम्हारा नाम सागर किनारे लिखा था मैंने ....



तुम्हारा नाम 
 पत्थर पर नही लिखा था मैंने 
पत्थरों पर लिखे नाम
वक्त के साथ धुंधला जाते है .........

तुम्हारा नाम ,
सागर किनारे लिखा था मैंने 
सागर के किनारे 
की रेत पर लिखे नाम 
कभी नहीं मिटते .......

 लहरों के साथ सागर 
में ही  मिल जाते है 
सागर किनारे लिखे नाम ,
बहते रहते है
 हर लहर के साथ 
न घुलते है न  गलते है ..

शायद इसी लिए ,
सागर का पानी खारा होता है ..

आंसुओं से 
जो लिखे होते है
सागर किनारे लिखे नाम ...

कभी अंजुरी भर कर देखोगे ,
किसी लहर पर किसी 
किरण को 
झिलमिलाती देखोगे
 तुम्हे 
लिखा नज़र आएगा 
तुम्हारा नाम .........