Monday, 7 September 2015

हंसे या मुस्कुराएं...

जिन्दगी सम्भली सी
बंधी है
एक नियत  दायरे में ,
या
खुल कर
बिखरने को आतुर है ।

चुप रहें ,
बात करें ,
हंसे या
मुस्कुराएं....

सही राह
चलते रहना है
या
नई पगडंडियां भी
आजमाना है ।

बदहवास सी
भटकन ही तो है
यह जिंदगी ।

4 comments:

  1. यही जींदगी है...

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  2. बहुत सुंदर

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  3. यही तो जिंदगी है ... बहुत खूब लिखा है ...

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