Saturday, 21 September 2013

हे देवी -देवता सुनो मेरी आर्त पुकार....

करती हूँ आज
आव्हान !
तैतीस करोड़ देवी -देवताओं का ,
हे देवी -देवता
सुनो मेरी आर्त पुकार
 हूँ मैं बेबस लाचार

मैंने तुमसे कभी ना  मांगी
 कोई भेंट
 ना ही झोली फैलाई
माँगा कोई वरदान

मैंने देखा
कविता के पास है
सुंदर साड़ी बंधेज की
 गले में सुंदर कुंदन का हार
मुझे नहीं चाहिए
साड़ी और हार !

नीलिमा के पास
अच्छा सा लेपटोप देखा मैंने
थोड़ी इर्ष्या तो हुई
लेकिन
तुमसे ये क्यूँ मांगू  मैं !

देखो !
मीना के पास भी है
सुन्दर चमचमाती कार
मुझे कार भी नहीं चाहिए
तुम देवी -देवताओं के आगे सब है बेकार

हां अब रमा की क्या बात करूँ
वह तो खुद ही है एक
जापानी गुडिया
मुझे किसी से कुछ ना चाहिए

बस तुम सभी देवी -देवता
चले आओ  सुन कर मेरी पुकार
दे दो मुझे बस हर एक
एक -एक रूपये का वरदान  ….