Sunday, 3 February 2013

वह तुम हो ...!


हर जगह ,हर तरफ 
बहुत लोग है ,
गहमागहमी है लोगों 
की हर तरफ
हर जगह ....
फिर भी मुझे ऐसा 
क्यूँ लगता है 
हर तरफ , हर जगह 
एक जगह तो 
रिक्त है ...
वह  तुम हो ...!
शायद तुम  ही हो ,
नहीं 'शायद' नहीं , 
सच में ही तुम 
ही हो ....
जिसकी कमी मुझे 
खलती रही है 
हर तरफ, हर जगह ....


22 comments:

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    1. संगीता जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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    1. संध्या जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  3. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. यशोदा जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  4. मन की उहापोह का सुंदर चित्रण .....

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    1. मोनिका जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  5. यही कमी एक दिन उसकी तरफ ले जाती है ।

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    1. इमरान अंसारी जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  6. सुंदर चित्रण .

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    1. मदन मोहन जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  7. मन के अहसासों का सुंदर चित्रण,,,,

    RECENT POST बदनसीबी,

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    1. धीरेन्द्र जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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    1. tbsingh जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  9. होता है ऐसा....कि‍सी एक की कमी जिंदगी वीरान कर देती है

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    1. रश्मि जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  10. किसी खास के लिए हमेशा दिल के कोने में जगह रहती है...
    भावपूर्ण अभिव्यक्ति .....

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    1. रीना जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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  11. तुम हरेक शै में किसी शै की कमी पाओगी

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    1. रमाकांत सिंह जी आपका हार्दिक धन्यवाद

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