Sunday, 13 January 2013

मतलब से बनी यह दुनिया .....

मतलब से बनी
यह दुनिया
मतलब तक ही
सिमटी है ...
कौन किसका यहाँ
सब मतलब से
ही मिलते है ....

जब तक मतलब
निभता है
मुस्कुराते है
गुनगुनाते है
प्य्रार -प्रेम भी
जतलाते हैं
मतलब निकला
अजनबी बन जाते है
अनदेखी-अनसुनी कर
निकल जाते हैं .....


मतलबी दुनिया में
मुस्कुराते चेहरों में
कौन सच्चा - कौन झूठा
मतलब पड़ने पर
पहचान पाते हैं ....
जो मतलब निकलने पर
गुम  हो जाते हैं ....