Wednesday, 31 October 2012

नन्हा

मैं छोटा सा ,नन्हा सा

और माँ कहती है

कि प्यारा सा ,

एक बच्चा हूँ....

प्यारा सा बच्चा

हूँ ......फिर भी

माँ स्कूल के

लिए जल्दी

जगा कर तैयार

करती .....

पता नहीं ये स्कूल

किसने बनाया होगा ...

मुझे तो कुछ भी

समझ आता

उससे पहले ही

टीचर जी लिखा

मिटा देती है ....

अब लिखा नहीं तो

कान भी मरोड़

देती है ....
अब लाल - लाल

कान लेकर घर

जाता हूँ तो ...

माँ आंसू भर के

गले लगा कर डांटती

है तो मुझे

अच्छा लगता है क्या ....

जब मैंने माँ को बताया ,

आज नालायक बच्चों

को एक तरफ बिठाया

उनमें से मैं भी एक था ...

पूछ बैठा कि माँ

यह नालायक क्या होता है ...

तो बस, माँ रो ही पड़ी ,

गले से लगा कर बोली

तुझे कहने वाले ही है रे

मेरे लाल ......

मैं अब भी नहीं समझा कि

टीचर जी ने ऐसा क्यूँ कहा..