Monday, 22 October 2012

लेकिन वे फिर भी मुस्कुराती है ....


औरतें कभी भी और
किसी को भी
 नहीं लगती अच्छी
जब वे मुस्कुराती है ,
हंसती है ,
या खिलखिलाती है ......

लेकिन वे फिर भी मुस्कुराती है ....

जब, बचपन में
उनका खिलौना छीन कर
किसी और को दे दिया
जाता है
या उनको कमतर आँका
जाता है .......

और जब
उनके बढ़ते कदमो को
बाँध लिया  जाता लिया हो
या आसमान छूने की
तमन्ना के पर काट दिए जाते हों....

और
जब उनकी जड़ें एक आंगन
से दूसरे आंगन में रोप दी
जाती है ...चाहे
उस आँगन में उसे
गर्म हवाओं के थपेड़े ही
क्यों न सहन करना पड़े...

तब भी वे मुस्कुराती  ही है
क्यूंकि
उन्हें पता है उनके आंसूं जब
निकलेंगे तो
एक सैलाब जैसा ही कुछ
आ जाएगा इस धरा पर ......

अपने इन आंसुओं को
अपनी आँखों में ही छुपा कर
बस मुस्कुराती है ,
खिलखिलाती है .....

क्यूंकि नहीं अच्छी लगती
औरते कभी भी
मुस्कुराती हुई  ..........