Thursday, 5 July 2012

एक उम्मीद का दीया

मुहब्बत का तो हमें मालूम नहीं ,

नफरत तो ना  कर सके तुझसे ........


एक उम्मीद का दीया अब भी ,


जला कर बैठे है तुझे मालूम नहीं ...........

6 comments:

  1. ummeed par duniyaa kaayam hai ... :) bahut sundar !!

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  2. भावभीनी रचना...
    सुन्दर....
    :-)

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  3. चाहत का दीया न मैंने बुझने दिया .......

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