Thursday, 21 June 2012

एक अटल फैसला ( ? )

हर सुबह एक फैसला ले कर उठती हूँ 
एक अटल फैसला ले कर 
बिलकुल "अटल जी" की तरह 
आर या पार की लड़ाई का फैसला 
आखिर मेरे भी तो हाथ-पैर है 
मैं भी चला सकती हूँ , फिर क्यूँ
रोज़ -रोज़ का ये सहन करना ..
बस आज बात कर ही लूंगी उससे
फिर जो भी होगा देखा जायेगा .......
पर मेरी सारी आर -पार की लड़ाई
कहीं गुम हो जाती है
दिल में ख़ुशी सी भर जाती और होठों
पर राहत भरी मुस्कान .....
जब भरी गर्मी में, बरसात की "बदली" सी ,
काले मेघों सी छवि में श्वेत- धवल दन्त
पंक्ति चमकती है ...
बीबी जी ,आज फिर देर हो गयी ...
और मैं उसकी राम कहानी से बचने के
लिए .बोल पड़ती हूँ 

अरी , बहुत गर्मी है ,जरा ठंडा पानी पी ले ...