Sunday, 22 July 2012

तुम्हारा मौन ......


मैंने जब भी तुमको पुकारा
 तुम मौन तो नहीं रहे कभी .....
पर आज मेरे पुकारने पर तुम ,
मौन ही रहे .....
 तुम्हारा मौन रहना मुझे
अखर गया ,
पर
तुमसे ज्यादा तो तुम्हारा
मौन ही मुखर
हो कर बोलता रहा .......
और
मैं सुनती रही पलकें नम
किये .....
तुम्हारे जाने के बाद
खुद को
तुम्हारे मौन ,
और तुम्हारे अहसास से
ही घिरा पाया ...........