Thursday, 17 June 2021
तुमने कहा था
Friday, 16 April 2021
वह बन बैठा है रब जैसा
कोई है
जो है
अपना सा
मगर
है वह
अनजाना सा ...
हर रोज
पाती लिखी जाती है
उसे ...
हर रोज
दुआ में हाथ उठते हैं
सलामती की
होती है
एक दुआ
उसके नाम की भी
मगर
जाना-अनजाना
बेखबर है
मगन है
कहीं दूर
बहुत ही दूर ...
थोड़ा बहरा भी है
शायद
नहीं सुनती
उसे
मंदिर की घंटियां
ह्रदय की पुकार ही ...
वह बन बैठा है
रब जैसा ,
शायद
नहीं यकीनन ही
बन बैठा है
रब जैसा ही ...
रब
जैसे ही वह
दिखाई देता है
मगर
सुनाई नहीं देता ,
सुनवाई भी नहीं करता !
Tuesday, 5 May 2020
मैं खामोश हूँ
Tuesday, 24 September 2019
मत देखो नीचे
उड़ जाओ
पर फैलाओ
टिका दो
आँखे आसमान पर
मत देखो
नीचे
धरा को
मत सोचो
धरा के
गुरुत्वाकर्षण को
टिकेंगे जितने
तुम्हारे पैर
उतनी ही मिलेगी
तुम्हें यह धरा
नहीं है ये धरा
तुम्हारे रहने के लिए
तुम हो सिर्फ
आसमान की ऊंचाइयों लिए
तलाश करो
अपने लिए
अपना एक नया आसमान
जहाँ हो,
तुम्हारे अपने ही
ग्रह -नक्षत्र
अपना ही एक सूरज
और और चाँद भी !
वहाँ
न चाँद को लगे ग्रहण
न ही सूरज को !
एक अपना
अलग ही ब्रह्माण्ड बना लो
जो हो तुम्हारा अपना ,
सिर्फ तुम्हारा !
Friday, 2 August 2019
ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਹੀ ਕਰਦੀ...
ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੈੰਨੂੰ ਯਾਦ
ਨਹੀ ਕਰਦੀ
ਯਾਦ ਤਾਂ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਕਦੇ ਵੀ
ਨਹੀ ਕੀਤਾ ...
ਯਾਦ ਕਿਵੇਂ ਕਰਦੀ ਤੈਨੂੰ
ਤੂ ਹੀ ਬਤਾ ਮੈਨੂੰ ,
ਪਹਿਲਾਂ ਤਾਂ ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ
ਤੇਰੇ ਭੁਲ ਜਾਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ
ਹੀ ਦਸ ਜਾ ...
ਜਦੋਂ ਤੈਨੂੰ ਭੁਲ ਜਾਵਾਂਗੀ
ਉਸ ਦਿਨ ਤੋਂ
ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨ ਲੱਗਾਂਗੀ
ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਹੀ ਕਰਦੀ ...
Tuesday, 11 June 2019
तुम्हारे नाम की है एक रेखा
हाथ में लकीरें है
कितनी सारी
छोटी-बड़ी,
बारीक,
बारीक से भी महीन !
जीवन रेखा
दिल की रेखा
दिमाग की रेखा
और
किस्मत वाली रेखा भी !
एक रेखा भी है
तुम्हारे नाम की |
जो उँगलियों के पोरवों से
फिसलती हुई
जीवन रेखा
दिल की रेखा
दिमाग की रेखा
और
किस्मत की रेखा से
मणिबन्ध में
आकर रूकी है |
थामे रहती है
कलाई मेरी
धड़कती है मेरे हर
ह्रदय के स्पंदन में |
जीती हूँ हर पल तुम्हें
हर धड़कते स्पंदन में
तुम्हारे होने का अहसास में |
Sunday, 19 May 2019
वह नहीं गया ,रह गया था
नहीं रुक पायेगा
उसे अब जाना ही होगा..
अब अगर रुक गया
जा नहीं पाएगा
शाम भी हो रही थी
जाना ही होगा उसे
अँधेरा गहराने से पहले ही..
जाने वाले को विदा तो दे दी थी
मुड़ कर देखा भी न था
फिर क्या हुआ था !
वह क्यों रुका
थोड़ा सा ठिठक भी गया था
जाने से पहले !
उसे मुड़ कर तो नहीं देखा गया था
फिर भी
कदमों की
पदचाप बता गई
वह नहीं गया
रह गया था
बस गया था
थोड़ा-थोड़ा हर जगह..
यहाँ -वहां
हर कोने में
छत की मुंडेर पर भी
और
ह्रदय के तिकोने वाले हिस्से में भी।