Saturday, 28 March 2015

राम का राम होना आसान तो न था।

राम का
राम होना
आसान तो न था।

हर कोई
उर्मिला, कौशल्या ,
सुमित्रा के त्याग को सराहते ,
सीता पर हुए
अन्याय को है गाते.…

सीता को देख
लक्ष्मण रेखा के भीतर ,
हर कोई  छटपटाता ,
राम के
 मन के सागर में
लगा बाँध
राम किसे दिखाता ....

पुत्र राम सा हो ,
लेकिन
वर राम सा नहीं।
परन्तु क्यों ?

क्या इसलिए
कसौटी पर रखा
सीता को
अग्निपरीक्षा की
या दिया
सीता को  वनवास।

राम के लिए भी
क्या आसान था !
 मर्यादा का
बाँध बना कर
 बंधन सा जीवन जीना।

 जीवन जीना मर्यादा में
जैसे चलना था
कंटक पथ पर  जैसे !
क्या सच में कठिन नहीं था
राम का राम सा होना !