Monday, 16 June 2014

मुस्कुराहटें छुपा देती है दिलों के राज़

मुस्कुराइए !
कि मुस्कुराहटें
छुपा देती है दिलों के राज़।

बन सकते हैं अफ़साने
जिन बातों से
मुस्कुराहटें रोक देती हैं ,
लबों पर आती बात।

बिन कही बातें
कह जाती है
तो
कभी -कभी
बेबसी छुपा भी जाती है
ये मुस्कुराहटें।

देखिये बस
मुस्कुराते लबों को ही,

न झाँकिये आँखों में कभी
ये आँखे इन मुस्कुराहटों
राज़ भी खोल देती है
बस मुस्कुराइए और मुस्कुराते रहिये।



10 comments:

  1. बहुत सुन्दर...

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  3. मुस्कुराहट पर बढ़िया विचार |

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  4. बस मुस्कुराइए और मुस्कुराते रहिए .. बहुत सुन्दर ..

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  5. इसीलिए कहा है -
    ये इतना जो मुस्करा रहे हैं ,
    क्या ग़म है जिसो छिपा रहे हैं!

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  7. सच कहा है ... मुस्कराहट छुपा लेती है हर राज ...

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  8. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !

    सच कहा आपने कि
    आंखे मुस्कुराहटों का राज खोल देती है !

    बहुत बहुत शुभकामनायें !

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  9. बिल्कुल सही कहा

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  10. Bilkul sahi muskurahato tale dab jaate hain har raz... Umda rachna

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