Monday, 16 June 2014

मुस्कुराहटें छुपा देती है दिलों के राज़

मुस्कुराइए !
कि मुस्कुराहटें
छुपा देती है दिलों के राज़।

बन सकते हैं अफ़साने
जिन बातों से
मुस्कुराहटें रोक देती हैं ,
लबों पर आती बात।

बिन कही बातें
कह जाती है
तो
कभी -कभी
बेबसी छुपा भी जाती है
ये मुस्कुराहटें।

देखिये बस
मुस्कुराते लबों को ही,

न झाँकिये आँखों में कभी
ये आँखे इन मुस्कुराहटों
राज़ भी खोल देती है
बस मुस्कुराइए और मुस्कुराते रहिये।